
गोपेश्वर/घाट। जिले के सुदूरवर्ती विकासखंड घाट के छह गांवों में चार साल पहले विद्युतीकरण का काम पूरा हो गया था, लेकिन ट्रायल के दिन के बाद यहां के ग्रामीणों को कभी बिजली के दर्शन नहीं हुए। वर्ष 2009 में बरसात के दौरान क्षतिग्रस्त हुई बिजली की लाइन और पोलों को आज तक ठीक नहीं किया जा सका।
विकासखंड के पैरी पंजाचौक, उपथरा, पलटिंगधार, सुतोल, गैरी और सीक गांव की करीब 3500 की आबादी आज भी अंधेरे में रातें काटने को मजबूर हैं। इन गांवों के विद्युतीकरण के लिए वर्ष 2005-06 में राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत स्वीकृति मिली थी। वर्ष 2009 में विद्युतीकरण का काम पूरा हो गया। इसी साल ट्रायल के तौर पर गांव में बिजली पहुंची लेकिन उसी दिन विभागीय कर्मचारियों के जाते ही बिजली गुल हो गई। इसी साल बरसात में कई जगह बिजली के पोल और लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। चार साल बीते लेकिन विभाग आज तक लाइनों की मरम्मत नहीं कर सका है। ग्रामीण पुष्कर सिंह, गोपाल सिंह, खिलाफ सिंह, नारायण सिंह, राम सिंह और कुंवर सिंह का कहना है ऊर्जा निगम और सरकार के नकारेपन के चलते हजारों लोग बिना बिजली के जीने को मजबूर हैं।
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विभाग की तरफ से इसी साल लाइन का सुधारीकरण कार्य किया जा रहा था। जून माह में आई आपदा से फिर लाइन क्षतिग्रस्त हो गई है। लाइन के सुधारीकरण के लिए इस्टीमेट तैयार कर वित्तीय स्वीकृति के लिए भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
